महासमुंद. छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले अंतर्गत कोमाखान क्षेत्र के झिटकी गांव में पिछले दिनों रात के समय घर में घुसकर छह ग्रामीणों को घायल करने वाले तेंदुए की मौत हो गई है। रेस्क्यू के दौरान सिर में आई गंभीर चोटों के कारण इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। वन विभाग द्वारा तेंदुए का अंतिम संस्कार कर दिया गया है।
हालाँकि, तेंदुए की मौत के बाद भी इलाके में खतरा टला नहीं है। बुधवार को झिटकी से लगे कारीपाठ के दादरखार जंगल में कथित तौर पर एक और तेंदुआ देखे जाने से ग्रामीणों में फिर से डर और दहशत का माहौल बन गया है।
दादरखार के जंगल में फिर दिखा दूसरा तेंदुआ, बकरियां छोड़कर भागा ग्रामीण
बुधवार दोपहर करीब 1 बजे झिटकी निवासी नान्हूराम चक्रधारी बकरियां चराने दादरखार जंगल की ओर गया था। नाले के पास उसने एक तेंदुए को बैठे देखा। तेंदुए को देखते ही नान्हूराम अपनी बकरियों को वहीं छोड़कर जान बचाकर गांव की तरफ भागा।
लगभग दो घंटे बाद वह दो अन्य ग्रामीणों को साथ लेकर दोबारा उस स्थान पर पहुंचा, लेकिन तब तक तेंदुआ जंगल के घने हिस्सों में जा चुका था। इस घटना के बाद से जंगल से सटे गांवों के लोग अपने मवेशियों को चराने और जंगल की ओर जाने से कतरा रहे हैं।
घर में सो रहे 6 लोगों पर किया था हमला, रायपुर सफारी में हुई मौत
गौरतलब है कि कुछ दिनों पूर्व झिटकी में आधी रात को करीब 1 बजे एक तेंदुआ ग्रामीण के घर में घुस आया था और सो रहे परिवार के 6 सदस्यों पर हमला कर घायल कर दिया था।
घटना के बाद रविवार सुबह जंगल सफारी रायपुर और कानन पेंडारी जू की 10 सदस्यीय टीम ने करीब 1 घंटे 40 मिनट के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद तेंदुए को ट्रैंकुलाइज (बेहोश) कर पिंजरे में कैद किया था।
जंगल सफारी के डीएफओ तेजस शेखर के अनुसार, रेस्क्यू के दौरान तेंदुए के सिर पर चार से अधिक गंभीर चोट के निशान पाए गए थे। इलाज के लिए उसे जंगल सफारी रायपुर लाया गया था, जहाँ उसकी मृत्यु हो गई। मौत के सटीक कारण और समय का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा।
संवेदनशील रास्तों पर चेतावनी बोर्ड न होने से ग्रामीणों में आक्रोश
घटना के 5 दिन बीत जाने के बाद भी पंडरीपानी, झिटकी और आसपास के संवेदनशील जंगल मार्गों पर वन विभाग द्वारा सुरक्षा बैनर या चेतावनी पोस्टर नहीं लगाए गए हैं। इससे ग्रामीणों और पशुपालकों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।
महासमुंद डीएफओ टी. श्रीनिवास ने आश्वासन दिया है कि प्रमुख संवेदनशील रास्तों पर जल्द ही चेतावनी पोस्टर लगाए जाएंगे और ग्रामीणों को सतर्क रहने के निर्देश दिए जा रहे हैं। वहीं, ग्रामीणों ने वन विभाग से गश्त (Patrolling) बढ़ाने और तुरंत सुरक्षा इंतजाम पुख्ता करने की मांग की है।









