इस्लामाबाद वार्ता बेनतीजा: 21 घंटे की मैराथन बातचीत के बाद भी अमेरिका-ईरान में टकराव बरकरार

नई दिल्ली. इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच करीब 21 घंटे तक चली लंबी और अहम बातचीत बिना किसी ठोस समझौते के समाप्त हो गई। दशकों बाद हुई इस उच्च स्तरीय वार्ता से उम्मीदें

Written by: Admin

Published on: April 12, 2026

नई दिल्ली. इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच करीब 21 घंटे तक चली लंबी और अहम बातचीत बिना किसी ठोस समझौते के समाप्त हो गई। दशकों बाद हुई इस उच्च स्तरीय वार्ता से उम्मीदें काफी थीं, लेकिन दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहरे मतभेद सामने आए। हालांकि, दोनों पक्षों ने आगे बातचीत जारी रखने के संकेत दिए हैं, लेकिन फिलहाल समाधान दूर नजर आ रहा है।

America-Iran Talk

1. परमाणु कार्यक्रम बना सबसे बड़ा विवाद
वार्ता का मुख्य केंद्र ईरान का परमाणु कार्यक्रम रहा। अमेरिका चाहता है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की अपनी क्षमता को पूरी तरह खत्म करे और यूरेनियम संवर्धन पर सख्त नियंत्रण लगाए। दूसरी ओर, ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता में हस्तक्षेप बताया और ऐसी शर्तों को मानने से साफ इनकार कर दिया।

2. प्रतिबंध और फ्रीज संपत्तियों पर टकराव
ईरान ने विदेशों में जमी अपनी संपत्तियों को वापस करने की मांग उठाई, जिनमें कतर सहित कई देशों में रखे फंड शामिल हैं। लेकिन अमेरिका इस पर सहमत नहीं हुआ। इससे आर्थिक राहत को लेकर दोनों देशों के बीच बड़ा मतभेद साफ दिखाई दिया।

3. होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण की खींचतान
रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज स्ट्रेट भी विवाद का बड़ा कारण बना। ईरान ने इस मार्ग पर अधिक नियंत्रण और ट्रांजिट फीस की मांग की, जबकि अमेरिका का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय मार्ग है, जहां से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है और इसे बिना बाधा के खुला रहना चाहिए।

4. क्षेत्रीय मुद्दों और मुआवजे की मांग
ईरान ने बातचीत को व्यापक बनाते हुए युद्ध मुआवजे और क्षेत्रीय स्तर पर युद्धविराम जैसे मुद्दे भी उठाए, जिनमें लेबनान जैसे क्षेत्र शामिल थे। अमेरिका ने इन मांगों से दूरी बनाते हुए केवल परमाणु कार्यक्रम और समुद्री सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित रखा।

5. अविश्वास और तनाव ने बिगाड़ी बात
पूरी बातचीत के दौरान दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी साफ नजर आई। कई मौकों पर माहौल तनावपूर्ण हो गया और तीखी बहस भी देखने को मिली। ईरान का प्रतिनिधिमंडल अपने साथ नागरिकों की पीड़ा के प्रतीक लेकर पहुंचा था, जबकि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर सख्त रुख अपनाने का आरोप लगाते रहे।

कुल मिलाकर, इस लंबी वार्ता के बावजूद कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। हालांकि बातचीत जारी रखने की इच्छा जताई गई है, लेकिन मतभेदों की गहराई को देखते हुए आगे की राह आसान नहीं होगी।

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