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महासमुंद जिले में नीलगाय का क्रूर शिकार: कुल्हाड़ी से हत्या, 2 आरोपी गिरफ्तार, 4 फरार | वन विभाग की सख्त कार्रवाई

On: May 4, 2026
नीलगाय का क्रूर शिकार
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महासमुंद. छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से वन्यजीव संरक्षण को झकझोर देने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है। यहां ग्राम सुखीपाली के शांतिनगर क्षेत्र में एक मादा नीलगाय का बेहद बेरहमी से शिकार किया गया। इस घटना ने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि वन विभाग को भी अलर्ट कर दिया है। त्वरित कार्रवाई करते हुए वन विभाग की टीम ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि चार अन्य आरोपी अब भी फरार हैं। इस घटना के साथ ही एक अलग मामले में घायल हिरण को बचाकर जंगल में छोड़ने की संवेदनशील पहल भी सामने आई है।

नीलगाय शिकार का पूरा मामला: कैसे दिया गया वारदात को अंजाम

जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 7 बजे कुछ ग्रामीण तेंदूपत्ता तोड़ने के लिए जंगल की ओर गए थे। इसी दौरान उनकी नजर एक नीलगाय पर पड़ी, जिसे आवारा कुत्तों का झुंड काफी देर से दौड़ा रहा था। लगातार भागने के कारण नीलगाय थककर कमजोर हो गई थी। इसी स्थिति का फायदा उठाते हुए कुछ लोगों ने उसे निशाना बना लिया।

शांतिनगर निवासी ईश्वर कुम्हार और टंकधर रात्रे ने भालूडोंगरी क्षेत्र के पास नीलगाय पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। पहले ही वार में नीलगाय गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर गई। इसके बाद आरोपियों ने लगातार उसके गले पर वार कर उसे मौत के घाट उतार दिया। यह पूरी घटना बेहद निर्ममता और गैरकानूनी तरीके से अंजाम दी गई।

शिकार के बाद मांस बनाने की तैयारी

नीलगाय की हत्या करने के बाद आरोपी यहीं नहीं रुके। उन्होंने मृत नीलगाय को घसीटकर पास के खेत में ले जाया और उसका मांस तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। इस दौरान अन्य ग्रामीण—सचिन कोलता, विद्याधर कोलता, सुरेंद्र झरेखा और जोहित झरेखा—भी मौके पर पहुंच गए और इस गैरकानूनी गतिविधि में शामिल हो गए।

यह घटना दर्शाती है कि किस तरह संगठित तरीके से वन्यजीवों का शिकार किया जा रहा है, जो वन्यजीव संरक्षण कानूनों का खुला उल्लंघन है।

वन विभाग की त्वरित कार्रवाई: 2 गिरफ्तार, 4 फरार

घटना की सूचना मिलते ही वन परिक्षेत्र अधिकारी सुखराम निराला अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। वन विभाग की टीम को देखते ही आरोपी भागने लगे, लेकिन अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए जोहित झरेखा को मौके पर ही पकड़ लिया।

पूछताछ के दौरान उसने अन्य आरोपियों के नाम बताए, जिसके आधार पर सुरेंद्र झरेखा को भी गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि, मुख्य आरोपी ईश्वर कुम्हार, टंकधर रात्रे और उनके दो अन्य साथी मौके से फरार होने में सफल रहे।

वन विभाग ने फरार आरोपियों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

मृत नीलगाय का पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार

वन अधिकारियों के अनुसार, मृत नीलगाय मादा थी और उसकी उम्र लगभग 4 वर्ष आंकी गई है। घटना के बाद वन विभाग ने नियमानुसार उसका पोस्टमार्टम कराया। साथ ही, चश्मदीद महिलाओं के बयान भी दर्ज किए गए हैं ताकि मामले को मजबूत बनाया जा सके।

पोस्टमार्टम के बाद वन विभाग ने नीलगाय का अंतिम संस्कार भी विधिवत तरीके से किया। यह पूरी प्रक्रिया वन्यजीव संरक्षण के नियमों के तहत की गई।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग ने सभी आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। इस कानून के तहत वन्यजीवों के शिकार, हत्या या अवैध व्यापार में शामिल लोगों को कड़ी सजा और भारी जुर्माना हो सकता है।

वन विभाग का कहना है कि इस तरह की घटनाओं को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों को जल्द ही गिरफ्तार कर कानून के हवाले किया जाएगा।

दूसरी घटना: घायल हिरण को बचाकर जंगल में छोड़ा गया

इसी क्षेत्र से एक सकारात्मक खबर भी सामने आई है। ग्राम गिरना के जंगल कक्ष क्रमांक 229 में एक हिरण अचानक पेड़ से टकराकर घायल हो गया।

बताया जा रहा है कि हिरण तेंदूपत्ता तोड़ने गए लोगों को देखकर घबरा गया और तेज रफ्तार में भागते हुए पेड़ से टकरा गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि वह गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा और उठ नहीं सका।

वन विभाग ने बचाई हिरण की जान

नीलगाय का क्रूर शिकार

घटना को देखते हुए ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और घायल हिरण का प्राथमिक उपचार किया।

इलाज के बाद जब हिरण की स्थिति में सुधार हुआ, तो उसे वापस उसके प्राकृतिक आवास यानी जंगल में छोड़ दिया गया। यह कार्रवाई वन विभाग की संवेदनशीलता और वन्यजीवों के प्रति उनकी जिम्मेदारी को दर्शाती है।

वन्यजीवों के प्रति बढ़ती क्रूरता: चिंता का विषय

नीलगाय शिकार की यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। वन्यजीवों के प्रति बढ़ती क्रूरता और अवैध शिकार की घटनाएं पर्यावरण संतुलन के लिए खतरा बनती जा रही हैं।

नीलगाय जैसे संरक्षित वन्यजीव का इस तरह शिकार किया जाना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति मानव की असंवेदनशीलता को भी उजागर करता है।

गार्डन में बैठे व्यक्ति को अज्ञात आरोपी ने चाकू मारकर किया घायल

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों में मानव हस्तक्षेप और संसाधनों के दोहन के कारण वन्यजीवों का व्यवहार बदल रहा है। ऐसे में जब वे गांवों के आसपास आते हैं, तो वे शिकारियों के निशाने पर आ जाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और कड़े कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन से ही इस समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

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